दुबई वाली बुआ। ❤️
कुछ लोग दूर रहते हैं, लेकिन हमारी कहानी में हमेशा मौजूद रहते हैं।
बुआ के लिए मेरा ख़त ↓आपने मुझे बनते हुए देखा है।
बुआ, जब मैं अपने बचपन के बारे में सोचता हूँ, तो उसमें आप भी हैं। आज हम कितनी आसानी से एक-दूसरे से वीडियो कॉल कर लेते हैं, लेकिन मुझे वो समय याद आता है जब बचपन में हम Google पर वीडियो चैट किया करते थे। आप दुबई में थीं, मैं यहाँ दिल्ली में — और फिर भी हम एक-दूसरे की ज़िंदगी का हिस्सा थे।
स्क्रीन छोटी होती थी, लेकिन उसके उस पार का रिश्ता कभी छोटा नहीं लगा।
आपने मुझे बचपन से बड़ा होते देखा है। वो समय भी देखा जब मुझे डांस करने का शौक़ था, और उसके बाद के बदलते हुए कई रूप भी। कभी मैं कुछ नया सीख रहा था, कभी किसी नई चीज़ में दिलचस्पी ले रहा था, और धीरे-धीरे अपनी राह ढूँढ़ रहा था।
हर दौर में आपकी एक ख़ास जगह रही है। सिर्फ़ रिश्ते में बुआ होने की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए भी कि आपने मेरे लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है।
“बुआ, आपने मुझे सिर्फ़ बड़ा होते नहीं देखा, आपने मुझे बनते हुए देखा है।”
समय के साथ हम सब बदलते हैं। हमारी बातें, हमारे सपने, हमारी पसंद — सब कुछ। लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनके बारे में सोचकर एक सुकून मिलता है: कोई है जिसने हमारी कहानी के शुरुआती पन्ने भी देखे हैं।
आज मैं इंटरनेट पर तरह-तरह की चीज़ें बना रहा हूँ। तो सोचा, क्यों न एक छोटा-सा कोना आपके लिए भी बनाया जाए? कोई बड़ा भाषण नहीं। बस दिल से एक धन्यवाद — इतने सालों से साथ रहने, मुझे समझने और रास्ता दिखाने के लिए।
दिल्ली से दुबई तक ढेर सारा प्यार। ❤️
आपका,
साहिल
दूरी सिर्फ़ नक़्शे पर है।
बुआ, ये पेज आपके लिए है। और हाँ, अब परिवार में आपके नाम का भी अपना इंटरनेट वाला पता है। 😄